सुबह और शाम के अज़कार: पूरा पाठ और स्रोत
सुबह शाम की दुआ और अज़कार छोटे-छोटे वाक्यों में, एक-एक करके पढ़ें: अरबी, उच्चारण, अर्थ और हर ज़िक्र का सटीक स्रोत। मुफ़्त, ऑफ़लाइन, बिना अकाउंट।
क़ुरआन
सूरह अल-फ़ातिहा
आरंभ (क़ुरआन 1)
क़ुरआन की सबसे महान सूरह।
أَعُوذُ بِاللَّهِ السَّمِيعِ الْعَلِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
अऊज़ु बिल्लाहिस्समीइल अलीमि मिनश्शैतानिर्रजीम
मैं सब कुछ सुनने वाले, सब कुछ जानने वाले अल्लाह की शरण में आता हूँ, धिक्कारे हुए शैतान से।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ ١
बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ٢
अल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
हर प्रकार की प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है।
الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ ٣
अर्रह्मानिर्रहीम
जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ ٤
मालिकि यौमिद्दीन
जो बदले के दिन का मालिक है।
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ ٥
इय्याका नअ्बुदु व इय्याका नस्तईन
(ऐ अल्लाह!) हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से सहायता माँगते हैं।
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ ٦
इह्दिनस्सिरातल मुस्तक़ीम
हमें सीधे मार्ग पर चला।
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ
सिरातल्लज़ीना अन्अम्ता अलैहिम
उन लोगों का मार्ग, जिनपर तूने अनुग्रह किया।
غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ ٧
ग़ैरिल मग़्ज़ूबि अलैहिम व लज़्ज़ाल्लीन
उनका नहीं, जिनपर तेरा प्रकोप हुआ और न ही उनका, जो गुमराह हैं।
क़ुरआन 1:1-7 · फ़ज़ीलत: बुख़ारी 4474 · इसकी फ़ज़ीलत के कारण पढ़ी जाती है; किसी विशेष हदीस में इसे सुबह या शाम से नहीं जोड़ा गया।
सूरह अल-बक़रा 1–5
गाय, आयतें 1–5 (क़ुरआन 2)
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
الم ١
अलिफ़ लाम मीम
अलिफ़, लाम, मीम।
ذَٰلِكَ الْكِتَابُ لَا رَيْبَ ۛ فِيهِ ۛ هُدًى لِّلْمُتَّقِينَ ٢
ज़ालिकल किताबु ला रैबा फ़ीह, हुदल्लिल मुत्तक़ीन
यह (क़ुरआन) वह पुस्तक है, जिसमें कोई संदेह नहीं, परहेज़गारों के लिए सर्वथा मार्गदर्शन है।
الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ الصَّلَاةَ
अल्लज़ीना युअ्मिनूना बिल ग़ैबि व युक़ीमूनस्सलाह
वे लोग जो ग़ैब (परोक्ष) पर ईमान लाते हैं, और नमाज़ की स्थापना करते हैं
وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ ٣
व मिम्मा रज़क़्नाहुम युन्फ़िक़ून
और जो कुछ हमने उन्हें दिया है, उसमें से ख़र्च करते हैं।
وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَا أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ
वल्लज़ीना युअ्मिनूना बिमा उन्ज़िला इलैका व मा उन्ज़िला मिन क़ब्लिक
तथा जो उसपर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी ओर उतारा गया और जो तुमसे पहले उतारा गया
وَبِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ ٤
व बिल आख़िरति हुम यूक़िनून
और आख़िरत पर वही लोग विश्वास रखते हैं।
أُولَٰئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ
उलाइका अला हुदम्मिर्रब्बिहिम
यही लोग अपने पालनहार के बताए हुए मार्ग पर हैं
وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ٥
व उलाइका हुमुल मुफ़्लिहून
तथा यही लोग सफल हैं।
क़ुरआन 2:1-5 · किसी विशेष हदीस में इसे सुबह या शाम से नहीं जोड़ा गया।
आयतुल कुर्सी
कुर्सी की आयत (क़ुरआन 2:255)
शाम तक जिन्नों से सुरक्षित रहता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ
अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम
अल्लाह (वह है कि) उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। (वह) जीवित है, हर चीज़ को सँभालने (क़ायम रखने) वाला है।
لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ
ला तअ्ख़ुज़ुहू सिनतुव्व ला नौम
न उसे कुछ ऊँघ पकड़ती है और न नींद।
لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ
लहू मा फ़िस्समावाति व मा फ़िल अर्ज़
उसी का है जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है।
مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ
मन ज़ल्लज़ी यश्फ़उ इन्दहू इल्ला बिइज़्निह
कौन है, जो उसके पास उसकी अनुमति के बिना अनुशंसा (सिफ़ारिश) करे?
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ
यअ्लमु मा बैना ऐदीहिम व मा ख़ल्फ़हुम
वह जानता है जो कुछ उनके सामने और जो कुछ उनके पीछे है।
وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ
व ला युहीतूना बिशैइम्मिन इल्मिही इल्ला बिमा शाअ्
और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को (अपने ज्ञान से) नहीं घेर सकते, परंतु जितना वह चाहे।
وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ
वसिअ कुर्सिय्युहुस्समावाति वल अर्ज़
उसकी कुर्सी आकाशों और धरती को व्याप्त है
وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ
व ला यऊदुहू हिफ़्ज़ुहुमा
और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती।
وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ ٢٥٥
व हुवल अलिय्युल अज़ीम
और वही सबसे ऊँचा, सबसे महान है।
शाम को:
सुबह तक जिन्नों से सुरक्षित रहता है।
क़ुरआन 2:255 · हाकिम 1/562 (सहीह, अलबानी) · हिस्नुल मुस्लिम 75 · अलबानी ने इसे सहीह कहा (सहीहुत तरग़ीब 662), लेकिन दूसरी जगह सुबह-शाम वाले शब्दों को शाज़ (असामान्य) वृद्धि माना (अस-सहीहा 7/743)।
सूरह अल-इख़लास
निष्ठा (क़ुरआन 112)
×3
ये तीनों सूरतें सुबह-शाम तीन-तीन बार पढ़ी जाएँ तो हर चीज़ से उसके लिए काफ़ी हैं।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ١
क़ुल हुवल्लाहु अहद
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : वह अल्लाह एक है।
اللَّهُ الصَّمَدُ ٢
अल्लाहुस्समद
अल्लाह बेनियाज़ है।
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ٣
लम यलिद व लम यूलद
न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान है।
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ ٤
व लम यकुल्लहू कुफ़ुवन अहद
और न कोई उसका समकक्ष है।
क़ुरआन 112:1-4 · अबू दाऊद 5082 (हसन, अलबानी) · तिर्मिज़ी 3575 (हसन, दारुस्सलाम) · हिस्नुल मुस्लिम 76
सूरह अल-फ़लक़
भोर (क़ुरआन 113)
×3
ये तीनों सूरतें सुबह-शाम तीन-तीन बार पढ़ी जाएँ तो हर चीज़ से उसके लिए काफ़ी हैं।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ١
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ।
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ٢
मिन शर्रि मा ख़लक़
उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की।
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ٣
व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब
तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए।
وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ٤
व मिन शर्रिन्नफ़्फ़ासाति फ़िल उक़द
तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से।
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ٥
व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद
तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।
क़ुरआन 113:1-5 · अबू दाऊद 5082 (हसन, अलबानी) · तिर्मिज़ी 3575 (हसन, दारुस्सलाम) · हिस्नुल मुस्लिम 76
सूरह अन-नास
मानवजाति (क़ुरआन 114)
×3
ये तीनों सूरतें सुबह-शाम तीन-तीन बार पढ़ी जाएँ तो हर चीज़ से उसके लिए काफ़ी हैं।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ١
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन्नास
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की।
مَلِكِ النَّاسِ ٢
मलिकिन्नास
लोगों के बादशाह की।
إِلَٰهِ النَّاسِ ٣
इलाहिन्नास
लोगों के सत्य पूज्य की।
مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ٤
मिन शर्रिल वस्वासिल ख़न्नास
वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से।
الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ٥
अल्लज़ी युवस्विसु फ़ी सुदूरिन्नास
जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है।
مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ٦
मिनल जिन्नति वन्नास
जिन्नों और इनसानों में से।
क़ुरआन 114:1-6 · अबू दाऊद 5082 (हसन, अलबानी) · तिर्मिज़ी 3575 (हसन, दारुस्सलाम) · हिस्नुल मुस्लिम 76
सूरह अल-बक़रा 285–286
अल-बक़रा (गाय) की अंतिम दो आयतें (क़ुरआन 2)
जो इन्हें रात में पढ़े, उसके लिए काफ़ी हैं।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
آمَنَ الرَّسُولُ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مِن رَّبِّهِ وَالْمُؤْمِنُونَ ۚ
आमनर्रसूलु बिमा उन्ज़िला इलैहि मिर्रब्बिही वल मुअ्मिनून
रसूल उस चीज़ पर ईमान लाए, जो उनकी तरफ़ उनके पालनहार की ओर से उतारी गई तथा सब ईमान वाले भी।
كُلٌّ آمَنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ
कुल्लुन आमना बिल्लाहि व मलाइकतिही व कुतुबिही व रुसुलिह
हर एक अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसकी पुस्तकों और उसके रसूलों पर ईमान लाया।
لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّن رُّسُلِهِ ۚ
ला नुफ़र्रिक़ु बैना अहदिम्मिर्रुसुलिह
(वे कहते हैं) हम उसके रसूलों में से किसी एक के बीच अंतर नहीं करते।
وَقَالُوا سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۖ
व क़ालू समिअ्ना व अतअ्ना
और उन्होंने कहा हमने सुना और हमने आज्ञापालन किया।
غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ ٢٨٥
ग़ुफ़्रानका रब्बना व इलैकल मसीर
हम तेरी क्षमा चाहते हैं ऐ हमारे पालनहार! और तेरी ही ओर लौटकर जाना है।
لَا يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۚ
ला युकल्लिफ़ुल्लाहु नफ़्सन इल्ला वुस्अहा
अल्लाह किसी प्राणी पर भार नहीं डालता परंतु उसकी क्षमता के अनुसार।
لَهَا مَا كَسَبَتْ وَعَلَيْهَا مَا اكْتَسَبَتْ ۗ
लहा मा कसबत व अलैहा मक्तसबत
उसी के लिए है जो उसने (नेकी) कमाई और उसी पर है जो उसने (पाप) कमाया।
رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا ۚ
रब्बना ला तुआख़िज़्ना इन नसीना औ अख़्तअ्ना
ऐ हमारे पालनहार! हमारी पकड़ न कर यदि हम भूल जाएँ या हमसे चूक हो जाए।
رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا ۚ
रब्बना व ला तह्मिल अलैना इस्रन कमा हमल्तहू अलल्लज़ीना मिन क़ब्लिना
ऐ हमारे पालनहार! और हमपर कोई भारी बोझ न डाल, जैसे तूने उसे उन लोगों पर डाला जो हमसे पहले थे।
رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِ ۖ
रब्बना व ला तुहम्मिल्ना मा ला ताक़ता लना बिह
ऐ हमारे पालनहार! और हमसे वह चीज़ न उठवा जिस (के उठाने) की हम में शक्ति न हो।
وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا ۚ
वअ्फ़ु अन्ना वग़्फ़िर लना वर्हम्ना
तथा हमें माफ़ कर और हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर।
أَنتَ مَوْلَانَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ ٢٨٦
अन्ता मौलाना फ़न्सुर्ना अलल क़ौमिल काफ़िरीन
तू ही हमारा स्वामी (संरक्षक) है, इसलिए काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।
क़ुरआन 2:285-286 · फ़ज़ीलत: बुख़ारी 5009 , मुस्लिम 808a · इसकी फ़ज़ीलत रात में पढ़ने के बारे में आई है।
दुआएँ
अस्बह्ना व अस्बहल मुल्कु लिल्लाह
सारा राज्य अल्लाह का है
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ
अस्बह्ना व अस्बहल मुल्कु लिल्लाह, वल हम्दु लिल्लाह
हमने सुबह की और अल्लाह के लिए राज्य ने भी सुबह की; सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीका लह
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं।
لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
लहुल मुल्कु व लहुल हम्द, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर
राज्य उसी का है और प्रशंसा उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर सामर्थ्य रखता है।
رَبِّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا فِي هَٰذَا الْيَوْمِ وَخَيْرَ مَا بَعْدَهُ
रब्बि अस्अलुका ख़ैरा मा फ़ी हाज़ल यौमि व ख़ैरा मा बअ्दह
ऐ मेरे रब! मैं तुझसे इस दिन में जो भलाई है और इसके बाद जो भलाई है, माँगता हूँ,
وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِي هَٰذَا الْيَوْمِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهُ
व अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा फ़ी हाज़ल यौमि व शर्रि मा बअ्दह
और इस दिन में जो बुराई है और इसके बाद जो बुराई है, उससे तेरी शरण में आता हूँ।
رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَسُوءِ الْكِبَرِ
रब्बि अऊज़ु बिका मिनल कसलि व सूइल किबर
ऐ मेरे रब! मैं आलस्य से और बुढ़ापे की ख़राबी से तेरी शरण में आता हूँ।
رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابٍ فِي النَّارِ وَعَذَابٍ فِي الْقَبْرِ
रब्बि अऊज़ु बिका मिन अज़ाबिन फ़िन्नारि व अज़ाबिन फ़िल क़ब्र
ऐ मेरे रब! मैं आग की यातना और क़ब्र की यातना से तेरी शरण में आता हूँ।
शाम को:
अम्सैना व अम्सल मुल्कु लिल्लाह
أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ
अम्सैना व अम्सल मुल्कु लिल्लाह, वल हम्दु लिल्लाह
हमने शाम की और अल्लाह के लिए राज्य ने भी शाम की; सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है।
رَبِّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا فِي هَٰذِهِ اللَّيْلَةِ وَخَيْرَ مَا بَعْدَهَا
रब्बि अस्अलुका ख़ैरा मा फ़ी हाज़िहिल्लैलति व ख़ैरा मा बअ्दहा
ऐ मेरे रब! मैं तुझसे इस रात में जो भलाई है और इसके बाद जो भलाई है, माँगता हूँ,
وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِي هَٰذِهِ اللَّيْلَةِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهَا
व अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा फ़ी हाज़िहिल्लैलति व शर्रि मा बअ्दहा
और इस रात में जो बुराई है और इसके बाद जो बुराई है, उससे तेरी शरण में आता हूँ।
मुस्लिम 2723b · हिस्नुल मुस्लिम 77
अल्लाहुम्मा बिका अस्बह्ना
तेरे ही हुक्म से हम जीते और मरते हैं
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا، وَبِكَ أَمْسَيْنَا
अल्लाहुम्मा बिका अस्बह्ना, व बिका अम्सैना
ऐ अल्लाह! तेरी ही कृपा से हमने सुबह की और तेरी ही कृपा से शाम की,
وَبِكَ نَحْيَا، وَبِكَ نَمُوتُ، وَإِلَيْكَ النُّشُورُ
व बिका नह्या, व बिका नमूतु, व इलैकन्नुशूर
तेरे ही हुक्म से हम जीते हैं और तेरे ही हुक्म से मरते हैं, और तेरी ही ओर उठकर जाना है।
शाम को:
अल्लाहुम्मा बिका अम्सैना
اللَّهُمَّ بِكَ أَمْسَيْنَا
अल्लाहुम्मा बिका अम्सैना
ऐ अल्लाह! तेरी ही कृपा से हमने शाम की,
अबू दाऊद 5068 (सहीह, अलबानी) · हिस्नुल मुस्लिम 78
सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार
क्षमा माँगने का सबसे उत्तम तरीक़ा
जो यक़ीन के साथ इसे पढ़े और उसी दिन मर जाए, वह जन्नत वालों में से है।
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي، لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्मा अन्ता रब्बी, ला इलाहा इल्ला अन्त
ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ
ख़लक़्तनी व अना अब्दुक
तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ,
وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ
व अना अला अह्दिका व वअ्दिका मस्ततअ्त
और मैं अपनी क्षमता भर तेरे वचन और वादे पर क़ायम हूँ।
أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ
अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सनअ्त
मैं अपने किए की बुराई से तेरी शरण में आता हूँ।
أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ لَكَ بِذَنْبِي
अबूउ लका बिनिअ्मतिका अलय्या, व अबूउ लका बिज़न्बी
मैं तेरे सामने अपने ऊपर तेरी नेमत को स्वीकार करता हूँ और तेरे सामने अपने गुनाह को स्वीकार करता हूँ,
فَاغْفِرْ لِي، فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
फ़ग़्फ़िर ली, फ़इन्नहू ला यग़्फ़िरुज़्ज़ुनूबा इल्ला अन्त
तो मुझे क्षमा कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को क्षमा नहीं करता।
शाम को:
जो यक़ीन के साथ इसे पढ़े और उसी रात मर जाए, वह जन्नत वालों में से है।
बुख़ारी 6306 · हिस्नुल मुस्लिम 79
अल्लाहुम्मा फ़ातिरस्समावाति वल अर्ज़
अपने नफ़्स और शैतान की बुराई से शरण
اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ، عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ
अल्लाहुम्मा फ़ातिरस्समावाति वल अर्ज़, आलिमल ग़ैबि वश्शहादह
ऐ अल्लाह! आकाशों और धरती के पैदा करने वाले, परोक्ष और प्रत्यक्ष के जानने वाले,
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ، رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ
ला इलाहा इल्ला अन्त, रब्बा कुल्लि शैइन व मलीकह
तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, तू हर चीज़ का रब और मालिक है।
أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي، وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشَرَكِهِ
अऊज़ु बिका मिन शर्रि नफ़्सी, व मिन शर्रिश्शैतानि व शरकिह
मैं अपने नफ़्स की बुराई से, और शैतान की बुराई और उसके जाल से तेरी शरण में आता हूँ,
وَأَنْ أَقْتَرِفَ عَلَىٰ نَفْسِي سُوءًا، أَوْ أَجُرَّهُ إِلَىٰ مُسْلِمٍ
व अन अक़्तरिफ़ा अला नफ़्सी सूअन, औ अजुर्रहू इला मुस्लिम
और इससे कि मैं अपने ऊपर कोई बुराई करूँ या उसे किसी मुसलमान तक पहुँचाऊँ।
तिर्मिज़ी 3529 (हसन, दारुस्सलाम) · हिस्नुल मुस्लिम 85
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्बह्तु उश्हिदुका
अल्लाह को अपने ईमान की गवाही पर गवाह बनाना
×4
चार बार पढ़ने पर अल्लाह उसे आग से आज़ाद कर देता है।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्बह्तु उश्हिदुक
ऐ अल्लाह! आज सुबह मैं तुझे गवाह बनाता हूँ,
وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ، وَمَلَائِكَتَكَ، وَجَمِيعَ خَلْقِكَ
व उश्हिदु हमलता अर्शिका, व मलाइकतका, व जमीअ ख़ल्क़िक
और तेरे अर्श को उठाने वालों, तेरे फ़रिश्तों और तेरी सारी सृष्टि को गवाह बनाता हूँ
أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ
अन्नका अन्तल्लाहु ला इलाहा इल्ला अन्त
कि तू ही अल्लाह है, तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं,
وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ
व अन्ना मुहम्मदन अब्दुका व रसूलुक
और यह कि मुहम्मद तेरे बंदे और तेरे रसूल हैं।
शाम को:
अल्लाहुम्मा इन्नी अम्सैतु उश्हिदुका
اللَّهُمَّ إِنِّي أَمْسَيْتُ أُشْهِدُكَ
अल्लाहुम्मा इन्नी अम्सैतु उश्हिदुक
ऐ अल्लाह! आज शाम मैं तुझे गवाह बनाता हूँ,
अबू दाऊद 5069 (ज़ईफ़ (कमज़ोर), अलबानी; सनद हसन, इब्ने बाज़) · हिस्नुल मुस्लिम 80
बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यज़ुर्रु
अल्लाह के नाम से सुरक्षा
×3
शाम तक उसे कोई अचानक मुसीबत नहीं पहुँचेगी।
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ
बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यज़ुर्रु मअस्मिही शैअ्
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती
فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ
फ़िल अर्ज़ि व ला फ़िस्समाअ्
न धरती में और न आकाश में,
وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
व हुवस्समीउल अलीम
और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
शाम को:
सुबह तक उसे कोई अचानक मुसीबत नहीं पहुँचेगी।
अबू दाऊद 5088 (सहीह, अलबानी) · तिर्मिज़ी 3388 (हसन, दारुस्सलाम) · हिस्नुल मुस्लिम 86
अऊज़ु बिकलिमातिल्लाह
अल्लाह के पूर्ण शब्दों की शरण
×3 · केवल शाम को
उस रात कोई डंक उसे नुक़सान नहीं पहुँचाएगा।
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ
अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित्ताम्मात
मैं अल्लाह के पूर्ण शब्दों की शरण में आता हूँ
مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
मिन शर्रि मा ख़लक़
उसकी पैदा की हुई हर चीज़ की बुराई से।
तिर्मिज़ी 3604b (सहीह, दारुस्सलाम) · मुस्लिम 2709a · हिस्नुल मुस्लिम 97
रज़ीतु बिल्लाहि रब्बा
अल्लाह, इस्लाम और नबी ﷺ से राज़ी
पूरी सुन्नत ×3
अल्लाह पर हक़ है कि क़यामत के दिन उसे राज़ी करे।
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا، وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا
रज़ीतु बिल्लाहि रब्बा, व बिल इस्लामि दीना
मैं अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर
وَبِمُحَمَّدٍ نَبِيًّا
व बिमुहम्मदिन नबिय्या
और मुहम्मद ﷺ के नबी होने पर राज़ी हूँ।
इब्ने माजा 3870 (हसन, दारुस्सलाम; ज़ईफ़ (कमज़ोर), अलबानी) · तिर्मिज़ी 3389 · हिस्नुल मुस्लिम 87 · अहमद 18969 में तीन बार (ज़ईफ़, अलबानी; सनद हसन, इब्ने बाज़, देखें हिस्नुल मुस्लिम 87)।
अल्लाहुम्मा मा अस्बहा बी मिन निअ्मह
हर नेमत केवल अल्लाह की ओर से है
उसने उस दिन का शुक्र अदा कर दिया।
اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ
अल्लाहुम्मा मा अस्बहा बी मिन निअ्मह
ऐ अल्लाह! आज सुबह मुझ पर जो भी नेमत है,
فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ
फ़मिन्का वह्दका ला शरीका लक
वह केवल तेरी ओर से है, तेरा कोई साझी नहीं,
فَلَكَ الْحَمْدُ وَلَكَ الشُّكْرُ
फ़लकल हम्दु व लकश्शुक्र
तो सारी प्रशंसा तेरे लिए है और सारा शुक्र तेरे लिए है।
शाम को:
अल्लाहुम्मा मा अम्सा बी मिन निअ्मह
اللَّهُمَّ مَا أَمْسَى بِي مِنْ نِعْمَةٍ
अल्लाहुम्मा मा अम्सा बी मिन निअ्मह
ऐ अल्लाह! आज शाम मुझ पर जो भी नेमत है,
उसने उस रात का शुक्र अदा कर दिया।
अबू दाऊद 5073 (ज़ईफ़ (कमज़ोर), अलबानी; सनद हसन, इब्ने बाज़) · हिस्नुल मुस्लिम 81
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुकल आफ़ियह
आफ़ियत और सुरक्षा की दुआ
नबी ﷺ सुबह और शाम इन दुआओं को कभी नहीं छोड़ते थे।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुकल आफ़ियता फ़िद्दुन्या वल आख़िरह
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत माँगता हूँ।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुकल अफ़्वा वल आफ़ियह
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे क्षमा और आफ़ियत माँगता हूँ
فِي دِينِي وَدُنْيَايَ، وَأَهْلِي وَمَالِي
फ़ी दीनी व दुन्याया, व अह्ली व माली
अपने दीन और दुनिया में, अपने घरवालों और माल में।
اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي، وَآمِنْ رَوْعَاتِي
अल्लाहुम्मस्तुर औराती, व आमिन रौआती
ऐ अल्लाह! मेरी कमियों को छिपा दे और मेरे डर को अमन में बदल दे।
اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ، وَمِنْ خَلْفِي
अल्लाहुम्मह्फ़ज़्नी मिन बैनि यदय्या, व मिन ख़ल्फ़ी
ऐ अल्लाह! मेरे आगे से और मेरे पीछे से मेरी रक्षा कर,
وَعَنْ يَمِينِي، وَعَنْ شِمَالِي، وَمِنْ فَوْقِي
व अन यमीनी, व अन शिमाली, व मिन फ़ौक़ी
मेरे दाएँ से, मेरे बाएँ से और मेरे ऊपर से,
وَأَعُوذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِي
व अऊज़ु बिअज़मतिका अन उग़्ताला मिन तह्ती
और मैं तेरी महानता की शरण में आता हूँ इससे कि मैं अपने नीचे से अचानक नष्ट कर दिया जाऊँ।
अबू दाऊद 5074 (सहीह, अलबानी) · इब्ने माजा 3871 (सहीह, दारुस्सलाम) · हिस्नुल मुस्लिम 84
ला इलाहा इल्लल्लाह
अल्लाह के एक होने का एलान
इस्माईल की संतान में से एक ग़ुलाम आज़ाद करने के बराबर; शाम तक शैतान से सुरक्षित।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीका लह
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं।
لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
लहुल मुल्कु व लहुल हम्द, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर
राज्य उसी का है और प्रशंसा उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर सामर्थ्य रखता है।
शाम को:
इस्माईल की संतान में से एक ग़ुलाम आज़ाद करने के बराबर; सुबह तक शैतान से सुरक्षित।
अबू दाऊद 5077 (सहीह, अलबानी) · हिस्नुल मुस्लिम 92
या हय्यु या क़य्यूम
अपने सारे कामों के सुधार की दुआ
नबी ﷺ ने यह फ़ातिमा को सिखाई।
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ، بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ
या हय्यु या क़य्यूम, बिरह्मतिका अस्तग़ीस
ऐ सदा जीवित रहने वाले, ऐ सबको सँभालने वाले! तेरी रहमत के सहारे मैं मदद माँगता हूँ।
أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ
अस्लिह ली शअ्नी कुल्लह
मेरे सारे काम सुधार दे,
وَلَا تَكِلْنِي إِلَىٰ نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ
व ला तकिल्नी इला नफ़्सी तर्फ़ता ऐन
और मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे अपने हवाले न कर।
नसाई, सुनन कुबरा 10405 (हसन, अलबानी) · हिस्नुल मुस्लिम 88
ला इलाहा इल्लल्लाह… युह्यी व युमीत
अल्लाह के एक होने का एलान: वही जीवन और मृत्यु देता है
×10 · केवल सुबह
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीका लह
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं।
لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ
लहुल मुल्कु व लहुल हम्द, युह्यी व युमीत
राज्य उसी का है और प्रशंसा उसी के लिए है; वही जीवन देता है और वही मृत्यु देता है,
وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर
और वह हर चीज़ पर सामर्थ्य रखता है।
तिर्मिज़ी 3474 (हसन, दारुस्सलाम) · इस रिवायत में इसे फ़ज्र की नमाज़ के बाद पढ़ा जाता है।
सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही अददा ख़ल्क़िह
अल्लाह की सृष्टि की संख्या के बराबर उसकी तस्बीह
×3 · केवल सुबह
तीन बार कहे गए ये शब्द, जुवैरिया ने फ़ज्र से चाश्त तक जो कुछ कहा था, उस सबसे तौले जाते तो भारी पड़ते।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ، عَدَدَ خَلْقِهِ
सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही, अददा ख़ल्क़िह
अल्लाह पवित्र है और प्रशंसा उसी के लिए है, उसकी सृष्टि की संख्या के बराबर,
وَرِضَا نَفْسِهِ
व रिज़ा नफ़्सिह
उसकी प्रसन्नता के बराबर,
وَزِنَةَ عَرْشِهِ
व ज़िनता अर्शिह
उसके अर्श के वज़न के बराबर,
وَمِدَادَ كَلِمَاتِهِ
व मिदादा कलिमातिह
और उसके शब्दों की स्याही के बराबर।
मुस्लिम 2726 · हिस्नुल मुस्लिम 94
ख़ैरा हाज़ल यौम
इस दिन की भलाई की दुआ
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
अस्बह्ना व अस्बहल मुल्कु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
हमने सुबह की और सारे संसारों के रब अल्लाह के लिए राज्य ने भी सुबह की।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَٰذَا الْيَوْمِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैरा हाज़ल यौम
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस दिन की भलाई माँगता हूँ:
فَتْحَهُ، وَنَصْرَهُ، وَنُورَهُ، وَبَرَكَتَهُ، وَهُدَاهُ
फ़त्हहू, व नस्रहू, व नूरहू, व बरकतहू, व हुदाह
इसकी विजय, इसकी मदद, इसका प्रकाश, इसकी बरकत और इसका मार्गदर्शन,
وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِيهِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهُ
व अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा फ़ीहि व शर्रि मा बअ्दह
और जो इसमें है उसकी बुराई से और इसके बाद की बुराई से तेरी शरण में आता हूँ।
शाम को:
ख़ैरा हाज़िहिल्लैलह
أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
अम्सैना व अम्सल मुल्कु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
हमने शाम की और सारे संसारों के रब अल्लाह के लिए राज्य ने भी शाम की।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَٰذِهِ اللَّيْلَةِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैरा हाज़िहिल्लैलह
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस रात की भलाई माँगता हूँ:
فَتْحَهَا، وَنَصْرَهَا، وَنُورَهَا، وَبَرَكَتَهَا، وَهُدَاهَا
फ़त्हहा, व नस्रहा, व नूरहा, व बरकतहा, व हुदाहा
इसकी विजय, इसकी मदद, इसका प्रकाश, इसकी बरकत और इसका मार्गदर्शन,
وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِيهَا وَشَرِّ مَا بَعْدَهَا
व अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा फ़ीहा व शर्रि मा बअ्दहा
और जो इसमें है उसकी बुराई से और इसके बाद की बुराई से तेरी शरण में आता हूँ।
अबू दाऊद 5084 (ज़ईफ़ (कमज़ोर), अलबानी) · हिस्नुल मुस्लिम 89
अल्लाहुम्मा आफ़िनी फ़ी बदनी
शरीर, सुनने और देखने की शक्ति में आफ़ियत
×3
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي
अल्लाहुम्मा आफ़िनी फ़ी बदनी
ऐ अल्लाह! मेरे शरीर को स्वस्थ रख।
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي
अल्लाहुम्मा आफ़िनी फ़ी सम्ई
ऐ अल्लाह! मेरी सुनने की शक्ति को स्वस्थ रख।
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَصَرِي
अल्लाहुम्मा आफ़िनी फ़ी बसरी
ऐ अल्लाह! मेरी देखने की शक्ति को स्वस्थ रख।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ
ला इलाहा इल्ला अन्त
तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ وَالْفَقْرِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल कुफ़्रि वल फ़क़्र
ऐ अल्लाह! मैं कुफ़्र और ग़रीबी से तेरी शरण में आता हूँ।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन अज़ाबिल क़ब्र
ऐ अल्लाह! मैं क़ब्र की यातना से तेरी शरण में आता हूँ।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ
ला इलाहा इल्ला अन्त
तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
अबू दाऊद 5090 (सनद हसन, अलबानी) · हिस्नुल मुस्लिम 82
अस्बह्ना अला फ़ित्रतिल इस्लाम
इस्लाम की फ़ितरत पर
أَصْبَحْنَا عَلَىٰ فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ
अस्बह्ना अला फ़ित्रतिल इस्लाम
हमने इस्लाम की फ़ितरत पर सुबह की,
وَعَلَىٰ كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ
व अला कलिमतिल इख़्लास
इख़लास के कलिमे पर,
وَعَلَىٰ دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ ﷺ
व अला दीनि नबिय्यिना मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
अपने नबी मुहम्मद ﷺ के दीन पर,
وَعَلَىٰ مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ، حَنِيفًا مُسْلِمًا
व अला मिल्लति अबीना इब्राहीमा, हनीफ़म्मुस्लिमा
और अपने पिता इब्राहीम की मिल्लत पर, जो एकनिष्ठ मुसलमान थे,
وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
व मा काना मिनल मुश्रिकीन
और वे मुशरिकों में से न थे।
शाम को:
अम्सैना अला फ़ित्रतिल इस्लाम
أَمْسَيْنَا عَلَىٰ فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ
अम्सैना अला फ़ित्रतिल इस्लाम
हमने इस्लाम की फ़ितरत पर शाम की,
अहमद 15360 · अहमद 15363 · हिस्नुल मुस्लिम 90 · सुबह: सहीह (अलबानी)। शाम को भी: इब्ने बाज़ के अनुसार सनद सहीह है; अलबानी ने इस वृद्धि को शाज़ (असामान्य) माना।
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका इल्मन नाफ़िआ
लाभदायक ज्ञान, पवित्र रोज़ी, स्वीकार्य कर्म
केवल सुबह
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका इल्मन नाफ़िआ
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभदायक ज्ञान,
وَرِزْقًا طَيِّبًا
व रिज़्क़न तय्यिबा
पवित्र रोज़ी
وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
व अमलन मुतक़ब्बला
और स्वीकार किया जाने वाला कर्म माँगता हूँ।
इब्ने माजा 925 (सहीह, दारुस्सलाम) · हिस्नुल मुस्लिम 95 · इस रिवायत में इसे फ़ज्र की नमाज़ के बाद पढ़ा जाता है।
छोटे अज़कार
हस्बियल्लाह
मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है
×7
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ
हस्बियल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवा
मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है; उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ، وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ
अलैहि तवक्कल्तु, व हुवा रब्बुल अर्शिल अज़ीम
मैंने उसी पर भरोसा किया और वह महान अर्श का रब है।
अबू दाऊद 5081 (मौज़ू (गढ़ी हुई), अलबानी) · हिस्नुल मुस्लिम 83
अस्तग़्फ़िरुल्लाहा व अतूबु इलैह
क्षमा माँगना और तौबा करना
×10 · पूरी सुन्नत ×100
नबी ﷺ दिन में सौ बार क्षमा माँगते और तौबा करते थे।
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
अस्तग़्फ़िरुल्लाहा व अतूबु इलैह
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ और उसकी ओर तौबा करता हूँ।
इब्ने माजा 3815 (हसन, दारुस्सलाम) · मुस्लिम 2702a · बुख़ारी 6307 · हिस्नुल मुस्लिम 96
सुब्हानल्लाह
अल्लाह पवित्र है
×10
سُبْحَانَ اللَّهِ
सुब्हानल्लाह
अल्लाह पवित्र है।
सामान्य ज़िक्र; सुबह या शाम के लिए कोई विशेष रिवायत नहीं।
अल हम्दु लिल्लाह
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है
×10
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अल हम्दु लिल्लाह
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है।
सामान्य ज़िक्र; सुबह या शाम के लिए कोई विशेष रिवायत नहीं।
अल्लाहु अक्बर
अल्लाह सबसे बड़ा है
×10
اللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाहु अक्बर
अल्लाह सबसे बड़ा है।
सामान्य ज़िक्र; सुबह या शाम के लिए कोई विशेष रिवायत नहीं।
ला इलाहा इल्लल्लाह ×10
अल्लाह के एक होने का एलान
×10
इस्माईल की संतान में से चार लोगों को आज़ाद करने के बराबर।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीका लह
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं।
لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
लहुल मुल्कु व लहुल हम्द, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर
राज्य उसी का है और प्रशंसा उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर सामर्थ्य रखता है।
मुस्लिम 2693 · बुख़ारी 6404 · हिस्नुल मुस्लिम 92 · फ़ज़ीलत: मुस्लिम 2693
सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिह
अल्लाह पवित्र है और प्रशंसा उसी के लिए है
×10 · पूरी सुन्नत ×100
सौ बार: क़यामत के दिन कोई इससे बेहतर कुछ नहीं लाएगा, सिवाय उसके जिसने इतना ही या इससे ज़्यादा कहा हो।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिह
अल्लाह पवित्र है और प्रशंसा उसी के लिए है।
मुस्लिम 2692 · बुख़ारी 6405 · हिस्नुल मुस्लिम 91 · सुन्नत में संख्या सौ बार है।
अस्सलातुल इब्राहीमिय्यह
नबी ﷺ पर दुरूद भेजना
पूरी सुन्नत ×10
जो नबी ﷺ पर एक बार दुरूद भेजे, अल्लाह उस पर दस बार रहमत भेजता है।
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर रहमत भेज,
كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ
कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम
जैसे तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर रहमत भेजी;
إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
इन्नका हमीदुम्मजीद
निःसंदेह तू प्रशंसनीय, महिमावान है।
اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर बरकत उतार,
كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ
कमा बारक्ता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम
जैसे तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर बरकत उतारी;
إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
इन्नका हमीदुम्मजीद
निःसंदेह तू प्रशंसनीय, महिमावान है।
बुख़ारी 3370 · फ़ज़ीलत: मुस्लिम 408 · सुबह और शाम दस-दस बार: तबरानी (देखें हिस्नुल मुस्लिम 98); ज़ईफ़ (अलबानी)।